एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसका परिवार बहुत गरीब था, लेकिन उसके सपने आसमान से भी ऊँचे थे। वह एक महान डॉक्टर बनना चाहता था। उसके दोस्त अक्सर उसका मज़ाक उड़ाते थे, "अर्जुन, तुम एक किसान के बेटे हो, इतने बड़े सपने मत देखो!"
अर्जुन उनकी बातों से दुखी नहीं होता था। वह हमेशा अपने मन में यही सोचता था, "मैं एक महान डॉक्टर बनूँगा और लोगों की सेवा करूँगा।"
सालों की कड़ी मेहनत के बाद, अर्जुन को एक बड़े मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल गया। लेकिन तभी एक भयानक बाढ़ आई और अर्जुन के घर के साथ-साथ उसकी पढ़ाई के लिए जमा किए गए सारे पैसे भी बह गए। गाँव वालों को लगा कि अब अर्जुन का सपना टूट गया है। लेकिन अर्जुन टूटा नहीं। उसने सोचा, "बाढ़ ने मेरा पैसा छीना है, मेरा हौसला और मेरा सपना नहीं।"\n उसने दिन में खेतों में काम किया और रात में दीये की रोशनी में पढ़ाई की। धीरे-धीरे उसने फिर से पैसे जुटाए और अपनी पढ़ाई पूरी की। अंत में, अर्जुन एक प्रसिद्ध डॉक्टर बना। उसकी सफलता उसके ऊँचे विचारों का ही परिणाम थी।