एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसे मिट्टी के बर्तन बनाना बहुत पसंद था। उसके दादाजी एक बहुत अच्छे कुम्हार थे। एक दिन, अर्जुन ने खुद एक मिट्टी का बर्तन बनाने का फैसला किया। उसने बहुत मेहनत से एक सुंदर बर्तन बनाया। लेकिन जब वह बर्तन के किनारों को ठीक कर रहा था, तो उसे थकान महसूस हुई। उसने सोचा, 'अभी थोड़ा काम बाकी है, कल कर लूँगा।' और उसने उस बर्तन को अधूरा ही छोड़ दिया और खेलने चला गया।
कुछ दिनों बाद, गाँव में एक बड़ा मेला लगा। अर्जुन के दादाजी मेले में कुछ नए बर्तन ले जाना चाहते थे। अर्जुन अपना बनाया हुआ बर्तन दिखाने भागा। लेकिन क्योंकि उसने काम अधूरा छोड़ दिया था, बर्तन ठीक से सूख नहीं पाया और उसमें एक बड़ी दरार आ गई। बर्तन टूट गया। अर्जुन बहुत दुखी हुआ। तब उसके दादाजी ने उसे समझाया, 'अर्जुन, जब भी कोई काम शुरू करो, तो उसे पूरा करके ही छोड़ो। जो लोग अपने काम को बीच में ही छोड़ देते हैं, दुनिया भी उनका साथ छोड़ देती है।' अर्जुन को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने वादा किया कि वह अब कभी कोई काम अधूरा नहीं छोड़ेगा।