एक सुंदर गाँव में कदिर नाम का एक लड़का अपने पिता सोमू के साथ रहता था। सोमू एक किसान था। एक साल, लगातार कई महीनों तक हुई भारी बारिश के कारण उनका पूरा खेत बाढ़ में डूब गया। सारी फसलें बर्बाद हो गईं। सोमू बहुत निराश था और गहरे दुख में डूबा था। अपने पिता को इस तरह टूटते देख कदिर का मन भी भारी हो गया।
लेकिन कदिर ने हार नहीं मानी। उसने अपने पिता के पास जाकर धीरे से कहा, "पिताजी, घबराइए मत। जब बाढ़ का पानी कम होगा, तो यह मिट्टी और भी उपजाऊ हो जाएगी। हम फिर से नए बीज बोएंगे और वे पहले से भी बेहतर उगेंगे।"
पहले तो सोमू को उसकी बात पर यकीन नहीं हुआ, लेकिन कदिर के अडिग विश्वास और उसकी समझदारी ने सोमू के मन को बदल दिया। सोमू ने महसूस किया कि बाढ़ भले ही बड़ी है, लेकिन उसके बेटे की सोच उससे भी बड़ी है। कदिर की उस सकारात्मक सोच ने सोमू को फिर से खड़े होने का साहस दिया। जब बारिश रुकी, तो उन्होंने मिलकर फिर से मेहनत की और खेत को फिर से हरा-भरा कर दिया। कदिर की बुद्धिमानी ने उन्हें डूबने से बचा लिया।