एक सुंदर पहाड़ी राज्य में राजा विक्रम राज करते थे। उनके सबसे भरोसेमंद मंत्री थे अर्जुन। अर्जुन न केवल विद्वान थे, बल्कि बहुत मेहनती और दयालु भी थे। एक बार राज्य में भीषण अकाल पड़ने की आशंका हुई। दरबार में चर्चा छिड़ गई कि क्या राज्य के अनाज के भंडार को बेचकर धन इकट्ठा कर लेना चाहिए। कुछ सलाहकारों ने कहा कि अनाज बेचना ही समझदारी है।
लेकिन अर्जुन ने दृढ़ता से कहा, "नहीं, यह अनाज हमारे लोगों के काम आएगा। संकट के समय धन नहीं, भोजन काम आता है।" कई लोगों ने अर्जुन का मजाक उड़ाया और उन्हें गलत ठहराने की कोशिश की। लेकिन अर्जुन अपने फैसले पर अडिग रहे। उन्होंने अनाज को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की। कुछ समय बाद अकाल पड़ा, लेकिन अर्जुन की सूझबूझ और उनके द्वारा सुरक्षित रखे गए अनाज की वजह से राज्य के लोग भूखे नहीं रहे। राजा विक्रम ने महसूस किया कि अर्जुन की विद्वत्ता के साथ-साथ, कठिन समय में उनकी 'दृढ़ता' (Firmness) ने ही राज्य को बचाया है।