चंद्रपुर नामक एक सुंदर राज्य में विक्रम नाम का एक युवा राजा रहता था। विक्रम बहादुर था, लेकिन वह बहुत जल्दबाज़ भी था। उसके मंत्री माधव बहुत बुद्धिमान और शांत स्वभाव के थे। एक दिन, विक्रम ने अपने पड़ोसी राज्य के साथ युद्ध करने का फैसला किया। माधव जानते थे कि यह निर्णय राज्य के लिए विनाशकारी होगा।
दरबार में विक्रम ने घोषणा की, 'हमें अपनी शक्ति दिखाने के लिए युद्ध करना चाहिए!' माधव घबराए हुए थे, लेकिन उन्होंने सच बोलने का साहस जुटाया। वे खड़े हुए और बोले, 'महाराज, युद्ध केवल दुख और गरीबी लाएगा। हमें शांति से बात करनी चाहिए।' विक्रम क्रोधित हो गया और बोला, 'क्या तुम मुझे सिखा रहे हो?' माधव डरे नहीं, उन्होंने शांति से कहा, 'महाराज, यदि आप गलत मार्ग पर हैं, तो आपको सही राह दिखाना ही एक मंत्री का धर्म है।' माधव की ईमानदारी देखकर विक्रम का क्रोध शांत हुआ और उसने युद्ध का विचार त्याग दिया। माधव के साहस ने पूरे राज्य को बचा लिया।