नीलगिरी नाम के एक सुंदर गाँव में सोमू नाम का एक किसान रहता था। सोमू का एक बड़ा सपना था: वह अपने गाँव के सूखे खेतों तक पानी पहुँचाने के लिए एक बड़ी नहर बनाना चाहता था।
इस काम को संभालने के लिए उसने अपने मित्र विक्रम को चुना। विक्रम बहुत बुद्धिमान था। उसने बहुत ही बारीकी से नक्शे बनाए, यह तय किया कि नहर कहाँ से गुजरेगी और कितनी गहरी होगी। उसकी योजना देखकर गाँव के सभी लोग बहुत खुश थे और उन्हें लगा कि विक्रम एक बेहतरीन प्रबंधक है।
लेकिन जब काम शुरू हुआ, तो मुश्किलें आने लगीं। विक्रम के पास कागज़ पर तो बेहतरीन योजना थी, लेकिन उसे असलियत में काम करने का अनुभव और कौशल नहीं था। वह मजदूरों को कैसे संभालना है या अचानक आने वाली समस्याओं को कैसे हल करना है, यह नहीं जानता था। एक दिन खुदाई के दौरान रास्ते में एक बहुत बड़ा पत्थर आ गया। विक्रम घबरा गया। उसे समझ नहीं आया कि उस पत्थर को कैसे हटाया जाए और न ही उसके पास कोई दूसरा रास्ता था।
नतीजतन, नहर का काम अधूरा रह गया। सारा पैसा बर्बाद हो गया और पानी खेतों तक नहीं पहुँच सका। विक्रम की योजना सही थी, लेकिन उसे पूरा करने की क्षमता उसमें नहीं थी। सोमू ने यह सबक सीखा कि केवल अच्छी योजना बनाना ही काफी नहीं है, उसे पूरा करने का हुनर भी होना चाहिए।