एक सुंदर गाँव में अर्जुन नाम का एक युवक रहता था। वह गाँव के मुखिया की मदद करता था। अर्जुन बहुत मेहनती था, लेकिन उसकी एक कमी थी—वह प्रशंसा पाने का बहुत शौकीन था।
एक बार मुखिया ने अर्जुन को एक काम सौंपा। "अर्जुन, गाँव के पुराने कुएँ की मरम्मत के लिए कुछ पैसे दिए गए हैं, इनका सही उपयोग करना," उन्होंने कहा।
अर्जुन ने एक योजना बनाई। कुआँ ठीक करने के बजाय, उसने गाँव की शान बढ़ाने के लिए एक बहुत बड़ा उत्सव आयोजित किया। गाँव के सभी लोग आए और अर्जुन की बहुत तारीफ की। लोग कहने लगे, "अर्जुन कितना महान है!" अर्जुन को बहुत अच्छा लगा। लेकिन, उत्सव में सारा पैसा खर्च हो गया और कुआँ ठीक नहीं हो पाया। जब गर्मी का मौसम आया, तो गाँव के लोग पानी के लिए तरसने लगे।
अर्जुन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसे प्रसिद्धि तो मिली, लेकिन गाँव का कोई भला नहीं हुआ। उसे बहुत दुख हुआ। उसने तय किया कि अब वह केवल तारीफ के लिए नहीं, बल्कि लोगों की भलाई के लिए काम करेगा। उसने दिन-रात मेहनत करके गाँव में पानी की नई व्यवस्था बनाई। अब गाँव वाले उसे दिल से दुआएं देते हैं, और इस बार अर्जुन को मिली प्रसिद्धि भी सच्ची और सुखद थी।