एक सुंदर से गाँव में करी नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत महत्वाकांक्षी था और हमेशा बड़े काम करने और अपने परिवार का नाम रोशन करने के सपने देखता था। वह अक्सर कहता था, 'मैं एक दिन बहुत बड़ा आदमी बनूँगा!'
एक बार गाँव में एक दौड़ प्रतियोगिता हुई। जीतने वाले को सोने का पदक मिलना था। दौड़ के दौरान, करी का एक दोस्त अचानक फिसल कर गिर गया। करी के पास आगे बढ़ने का मौका था। जीत के लालच में, करी रुका नहीं और तेजी से दौड़कर पहला स्थान प्राप्त कर लिया। उसे पदक भी मिला।
लेकिन उस पदक को देखकर करी को खुशी नहीं हुई। उसने सुना कि गाँव के लोग उसके बारे में बातें कर रहे थे, 'वह जीत तो गया, लेकिन अपने दोस्त को गिरता हुआ छोड़ दिया।' उसके पिता ने उसे समझाया, 'बेटा, यदि तुम ऊँचाइयों को छूना चाहते हो, तो ऐसे काम मत करना जिससे तुम्हारी साख और सम्मान मिट्टी में मिल जाए।' करी को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने सीखा कि सच्ची सफलता वही है जो ईमानदारी और सम्मान के साथ प्राप्त की जाए।