हरे-भरे पहाड़ों के बीच बसे एक छोटे से गाँव में करी नाम का एक लड़का रहता था। उसे लकड़ी का काम करना बहुत पसंद था। एक दिन, उसके पिता ने उसे एक चुनौती दी, 'करी, गाँव के उत्सव के लिए हमें लकड़ी का एक बड़ा झूला बनाना है। क्या तुम यह कर सकते हो?'
करी बहुत उत्साहित था, लेकिन काम शुरू करने के कुछ ही दिनों बाद मुश्किलें आने लगीं। कभी लकड़ी नहीं कटती, कभी उसके औज़ार सही काम नहीं करते, और कभी-कभी वह बहुत थक जाता था। उसके दोस्त रोहन ने कहा, 'करी, यह बहुत मुश्किल काम है। चलो इसे छोड़ देते हैं और खेलने चलते हैं!' \करी एक पल के लिए रुक गया। उसे लगा कि अगर उसके पास बेहतर औज़ार होते, तो काम आसान हो जाता। तभी उसे अपने पिता की बात याद आई: 'तुम्हारी सफलता तुम्हारे औज़ारों में नहीं, बल्कि तुम्हारे मन की दृढ़ता में है।' \करी ने हार नहीं मानी। उसने खुद अपने औज़ारों को तेज़ किया, सही योजना बनाई और अपनी थकान पर काबू पाया। चाहे कितनी भी बाधाएँ आईं, उसके मन में बस एक ही बात थी—'मुझे यह काम पूरा करना ही है।' अंत में, वह झूला बहुत सुंदर और मज़बूत बना। पूरे गाँव ने करी की प्रशंसा की। करी समझ गया कि उसकी जीत औज़ारों की वजह से नहीं, बल्कि उसके अटूट संकल्प की वजह से हुई थी।