एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसे बागवानी का बहुत शौक था। एक दिन उसके पिता एक छोटा सा पौधा लेकर आए। उन्होंने कहा, 'अर्जुन, इस पौधे को बढ़ने के लिए तुम्हें इसे तुरंत मिट्टी में लगाना होगा और समय पर पानी देना होगा।'
अर्जुन बहुत खुश था। उसने कहा, 'ठीक है पिताजी, मैं आज शाम को ही इसे लगा दूँगा!' लेकिन शाम को जब उसके दोस्त खेलने के लिए आए, तो उसने सोचा, 'कल सुबह लगा दूँगा, तब तक पौधा ताज़ा रहेगा।' अगले दिन बारिश हो गई, और उसके अगले दिन स्कूल का बहुत काम था। ऐसे ही काम टलता रहा।
एक हफ्ते बाद जब अर्जुन पौधा लगाने गया, तो उसने देखा कि पौधा सूख चुका था। सही समय पर न लगाने और पानी न मिलने के कारण वह पौधा मर गया। अर्जुन बहुत दुखी हुआ। तब उसके पिता ने उसे समझाया, 'बेटा, केवल योजना बनाना काफी नहीं है। जब तुम कोई निर्णय ले लो, तो उसे बिना देरी किए पूरा करना चाहिए। निर्णय लेने के बाद उसे टालना नुकसानदेह होता है।'
अर्जुन को अपनी गलती समझ आ गई। उसने वादा किया कि वह अब कभी भी किसी काम को कल पर नहीं टालेगा।