प्राचीन काल में चंद्रपुर नामक एक राज्य में विक्रम नाम का एक युवक रहता था। वह बहुत बुद्धिमान था, लेकिन राजा को लगता था कि एक राजदूत बनने के लिए उसमें कुछ और गुणों की कमी है। एक बार पड़ोसी राज्य मगध के साथ विवाद की स्थिति पैदा हो गई। युद्ध रोकने के लिए राजा ने विक्रम को दूत बनाकर भेजने का निर्णय लिया। जाने से पहले राजा ने उसे समझाया: 'एक सफल दूत होने के लिए तुम्हारे पास तीन चीजें होनी चाहिए: अपने राजा के प्रति सच्चा प्रेम, मामलों का गहरा ज्ञान, और दूसरों के सामने बोलने के लिए सही शब्दों का चयन करने की कला।'
मगध के दरबार में पहुँचकर विक्रम ने देखा कि वहाँ का माहौल बहुत तनावपूर्ण था। उसने सबसे पहले अपने राजा की ओर से मगध के राजा के प्रति सम्मान और प्रेम व्यक्त किया। इससे मगध के राजा का क्रोध शांत हुआ। इसके बाद, विक्रम ने अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए दोनों राज्यों के व्यापार को बढ़ाने वाली योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। अंत में, जब मगध का राजा उत्तेजित हुआ, तो विक्रम ने बहुत ही विनम्र और सटीक शब्दों का प्रयोग किया। उसकी बातों ने स्थिति को संभाल लिया। विक्रम के प्रेम, ज्ञान और वाकपटुता के कारण युद्ध टल गया और शांति स्थापित हुई।