बहुत समय पहले की बात है, अर्जुन नाम का एक समझदार युवक था। एक बार पड़ोसी राज्य के राजा विक्रम, अर्जुन के राजा से नाराज हो गए और युद्ध की तैयारी करने लगे।
अर्जुन के गुरु ने उसे समझाया, "अर्जुन, तुम्हें राजा विक्रम के पास जाकर शांति का संदेश देना होगा। लेकिन याद रखना, सही समय और सही जगह का चुनाव बहुत जरूरी है।"
अर्जुन तुरंत महल पहुँचा। लेकिन जब वह पहुँचा, राजा विक्रम अपने सेनापतियों के साथ गुस्से में बहस कर रहे थे। अर्जुन ने तुरंत शांति की बात शुरू कर दी। इससे राजा और भी क्रोधित हो गए और चिल्लाने लगे, "क्या तुम मुझे रोकने आए हो?"
अर्जुन को अपनी गलती का अहसास हुआ। वह चुपचाप वहाँ से हट गया। उसने अगले दो दिनों तक इंतज़ार किया और देखा कि राजा कब शांत होते हैं। तीसरे दिन शाम को, जब राजा अपने बगीचे में शांति से बैठे थे, अर्जुन उनके पास गया। उसने बहुत ही सम्मान के साथ और बहुत ही कोमल शब्दों में अपनी बात कही। क्योंकि अर्जुन ने सही समय, सही स्थान और सही तरीका चुना था, राजा का गुस्सा शांत हो गया और उन्होंने युद्ध टालने का निर्णय लिया।
अर्जुन ने सीखा कि केवल बोलना ही काफी नहीं है, बल्कि कब और कैसे बोलना है, यह जानना भी बहुत जरूरी है।