चोल साम्राज्य के एक सुंदर गाँव में इलंगो नाम का एक लड़का रहता था। उसके पिता राजा के महल में एक सेवक थे। एक दिन, जब इलंगो महल के गलियारे से गुजर रहा था, उसने देखा कि राजा और उनके मंत्री एक गुप्त सभा कर रहे हैं। सभा कक्ष का दरवाजा थोड़ा खुला था और अंदर से गंभीर चर्चा की आवाजें आ रही थीं।
इलंगो के मन में झाँकने की तीव्र इच्छा हुई। वह सोच रहा था कि क्या वह अंदर जाकर पूछ ले, 'महाराज, आप क्या चर्चा कर रहे हैं?' लेकिन उसे अपने पिता की सीख याद आई: 'जब कोई गुप्त बात कर रहा हो, तो उसे चोरी-छिपे सुनने या सवाल पूछकर परेशान करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।'
इलंगो चुपचाप वहाँ से हट गया और दूसरी दिशा में चला गया। कुछ देर बाद जब सभा समाप्त हुई और राजा बाहर आए, तो उन्होंने इलंगो को देखकर पूछा, 'इलंगो, क्या तुमने हमारी बातें नहीं सुनीं?' इलंगो ने विनम्रता से उत्तर दिया, 'महाराज, मुझे लगा कि आप बहुत महत्वपूर्ण चर्चा कर रहे हैं, इसलिए मैंने आपकी गोपनीयता का सम्मान करना ही उचित समझा।' राजा उसकी समझदारी और शिष्टाचार देखकर बहुत प्रसन्न हुए।