चंद्रपुर नामक एक सुंदर राज्य में राजकुमार विक्रम रहता था। उसका एक बहुत ही भरोसेमंद सलाहकार था, माधव। माधव हमेशा राजकुमार से बहुत ही विनम्रता और प्रेम से बात करता था। एक शाम, जब मानसून की बारिश शुरू होने वाली थी, राजकुमार ने घोषणा की, "माधव, कल मैं घने जंगल में शिकार पर जाने वाला हूँ। तुरंत सैनिकों और घोड़ों की तैयारी करो!"
माधव थोड़ा घबरा गया। उसे पता था कि भारी बारिश के कारण जंगल के रास्ते फिसलन भरे हो गए हैं और जंगली जानवर भी अधिक आक्रामक हो गए हैं। यदि वह राजकुमार की बात मान लेता, तो वह एक आज्ञाकारी सेवक कहलाता, लेकिन वह जानता था कि यह खतरनाक है। माधव ने धीरे से कहा, "राजकुमार, आपका साहस अतुलनीय है। लेकिन अभी बारिश के कारण जंगल में जाना बहुत जोखिम भरा है। इस समय शिकार करना सफलता के बजाय केवल संकट लाएगा। क्या हम बारिश कम होने का इंतज़ार कर सकते हैं?"
राजकुमार को पहले तो बहुत गुस्सा आया। लेकिन जब उसने माधव की बात पर विचार किया, तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। कुछ दिनों बाद जब मौसम ठीक हुआ, राजकुमार सुरक्षित रूप से शिकार पर गया। उसने समझा कि माधव की ईमानदारी ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति थी।