राजा विक्रम बहुत ही अनुशासित शासक थे। उनके मंत्री आदित्य बहुत ही शांत और बुद्धिमान व्यक्ति थे। एक दिन, सीमावर्ती गाँवों में भारी बाढ़ आने की खबर मिली। राजा विक्रम ने खुद को शांत रखते हुए कहा, 'अभी समय है, इतनी जल्दी क्या है?'
लेकिन आदित्य ने केवल राजा के शब्द नहीं सुने, बल्कि उनके चेहरे के भाव भी देखे। उन्होंने देखा कि राजा की आँखों में एक अजीब सी बेचैनी थी और उनके माथे पर चिंता की लकीरें थीं। राजा के कहे बिना ही आदित्य समझ गए कि राजा अंदर से चिंतित हैं। उन्होंने राजा के आदेश का इंतज़ार नहीं किया और तुरंत ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का काम शुरू कर दिया।
बाद में राजा ने हैरान होकर पूछा, 'मैंने तो अभी आदेश भी नहीं दिया, फिर तुमने यह सब कैसे किया?' आदित्य ने विनम्रता से उत्तर दिया, 'महाराज, आपके शब्दों से ज्यादा आपके मौन ने मुझे सब बता दिया। आपकी आँखों ने वह कह दिया जो आपके होंठ नहीं कह पाए।' आदित्य की इस सूझबूझ से हज़ारों लोगों की जान बच गई। राजा ने कहा कि आदित्य जैसे मंत्री दुनिया के लिए एक अनमोल रत्न हैं।