एक शांत गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का रहता था। आर्यन बहुत बुद्धिमान था, लेकिन जब भी उसे बड़ों या प्रभावशाली लोगों के सामने बोलना पड़ता, वह घबरा जाता था। एक दिन, उसके पिता ने उससे गाँव की परिषद के सामने एक महत्वपूर्ण योजना प्रस्तुत करने को कहा। परिषद के सदस्य बहुत सख्त और प्रभावशाली थे।
आर्यन डर गया और बोला, 'पिताजी, मैं नहीं कर पाऊंगा। वे मुझे देखकर इतना डराएंगे कि मैं सब कुछ भूल जाऊंगा।'
उसके पिता ने उसे समझाया, 'बेटा, डर केवल अज्ञानता से आता है। पहले यह समझो कि परिषद का स्वभाव कैसा है—वे किस तरह की बातें पसंद करते हैं। फिर, अपने विचारों को इतना स्पष्ट और शुद्ध बना लो कि तुम्हें खुद पर भरोसा हो जाए। यदि तुम सच जानते हो और उसे सही ढंग से कहना जानते हो, तो तुम कभी नहीं लड़खड़ाओगे।'
अगले दिन, आर्यन परिषद के सामने खड़ा हुआ। उसने पहले वहां के माहौल को ध्यान से देखा। उसने देखा कि वे तर्क और स्पष्टता को महत्व देते हैं। उसने गहरी सांस ली और बहुत ही संयमित और सटीक शब्दों में अपनी बात रखी। उसकी स्पष्टता और सच्चाई देखकर, परिषद के सदस्यों ने उसकी योजना को स्वीकार कर लिया।
आर्यन ने सीखा कि जब आप स्थिति को समझते हैं और अपने शब्दों पर नियंत्रण रखते हैं, तो आप किसी भी शक्तिशाली सभा के सामने निडर होकर बोल सकते हैं।