एक सुंदर से गाँव में आरव नाम का एक लड़का रहता था। आरव बहुत ही सीधा और सरल था, लेकिन उसे अजनबियों के सामने बोलने में बहुत डर लगता था। जब भी कोई नया व्यक्ति गाँव आता, आरव छिप जाता था।
एक दिन, एक पड़ोसी राज्य का राजकुमार अपने मंत्रियों के साथ गाँव आया। राजकुमार बहुत बुद्धिमान था और वह लोगों की बुद्धि परखने के लिए कठिन प्रश्न पूछता था। गाँव के बड़े-बुजुर्ग भी राजकुमार के तीखे सवालों का जवाब देने में हिचकिचा रहे थे। आरव के पिता, जो एक विद्वान थे, यह सब देख रहे थे।
उन्होंने आरव को पास बुलाया और कहा, 'बेटा, डर अज्ञानता से पैदा होता है। यदि तुम किसी अनजान दरबार में निडर होकर बोलना चाहते हो, तो तुम्हें भाषा के नियमों और तर्क (Logic) को अच्छी तरह सीखना होगा। तभी तुम कठिन सवालों का सामना कर पाओगे।'
आरव ने अपने पिता की बात मान ली। उसने महीनों तक व्याकरण और तर्कशास्त्र का कड़ा अभ्यास किया। कुछ समय बाद, राजकुमार फिर से आया और उसने एक पेचीदा पहेली पूछी। जहाँ सब चुप थे, वहीं आरव आत्मविश्वास के साथ आगे आया और बहुत ही तार्किक ढंग से उसका उत्तर दिया। राजकुमार उसकी बुद्धिमानी देखकर दंग रह गया! आरव ने समझ लिया कि ज्ञान ही असली साहस है।