बहुत समय पहले की बात है, 'सुखपुर' नाम का एक बहुत ही सुंदर और समृद्ध राज्य था। वहाँ के राजा, विक्रम, अपनी न्यायप्रियता के लिए जाने जाते थे। सुखपुर के लोग बहुत खुश थे। लेकिन, पड़ोसी राज्य के राजा, ज़ोरावर के मन में सुखपुर की समृद्धि को देखकर लालच आ गया। उसने सुखपुर पर हमला करने का निर्णय लिया।
युद्ध के दौरान, सुखपुर की कुछ सीमाएँ और खेत क्षतिग्रस्त हो गए। लोग डर गए कि अब उनका जीवन कैसे चलेगा। लेकिन राजा विक्रम ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने लोगों को इकट्ठा किया और कहा, 'मुसीबतें हमें तोड़ने नहीं, बल्कि हमें और मजबूत बनाने आती हैं।' युद्ध के बाद, राजा ने तुरंत खेतों की मरम्मत करवाई और किसानों को नए बीज और सहायता प्रदान की।
कुछ ही समय में, एक चमत्कार हुआ। सुखपुर के खेतों में पहले से भी अधिक फसल होने लगी। दुश्मनों के हमले से राज्य को कुछ नुकसान तो हुआ था, लेकिन राज्य की खुशहाली और समृद्धि में कोई कमी नहीं आई। लोगों ने महसूस किया कि सच्चा राज्य वह नहीं है जिसे कभी कोई चोट न लगे, बल्कि वह है जो चोट लगने के बाद भी अपनी संपन्नता और शक्ति को बनाए रखता है।