एक छोटे से गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का और विक्रम नाम का एक अमीर व्यापारी रहता था। आर्यन एक बहुत ही गरीब परिवार से था। उसके कपड़े फटे हुए थे और उसके पास एक पुरानी थैली थी। गाँव के लोग उसे देखकर अक्सर कहते, 'यह गरीब लड़का यहाँ क्या कर रहा है?' कोई भी उससे प्यार से बात नहीं करता था और सब उसे अनदेखा कर देते थे।
दूसरी ओर, विक्रम एक बड़े महल में रहता था। वह गाँव का सबसे प्रभावशाली व्यक्ति था। जहाँ भी विक्रम जाता, लोग उसके पीछे हो लेते। लोग कहते, 'विक्रम कितना महान व्यक्ति है! वह कितना बुद्धिमान है!' एक बार विक्रम ने एक बहुत बड़ा भोज आयोजित किया। वहाँ आए सभी लोग केवल विक्रम की धन-दौलत देखकर उसकी प्रशंसा कर रहे थे। दूर खड़े आर्यन ने यह देखा और सोचा, 'क्या लोग इंसान की अच्छाई की प्रशंसा करते हैं या उसके धन की?'
कई साल बीत गए। आर्यन ने कड़ी मेहनत की, पढ़ाई की और एक बहुत बड़ा व्यवसायी बन गया। जब वह अमीर बनकर गाँव लौटा, तो सब कुछ बदल गया। जो लोग उसे पहले नज़रअंदाज़ करते थे, वे अब उसके स्वागत में खड़े थे। 'आर्यन कितना महान आदमी है! कितना प्रभावशाली है!' वे सब कहने लगे। आर्यन समझ गया कि दुनिया इंसान के चरित्र से ज्यादा उसके धन को महत्व देती है।