बहुत समय पहले की बात है, एक छोटा और शांत राज्य था। वहाँ के राजा विक्रम बहुत दयालु थे, लेकिन उनका राज्य आर्थिक रूप से बहुत कमजोर था। उनके पुत्र आर्यन ने एक दिन पूछा, 'पिताजी, हम इतने अभाव में क्यों रहते हैं? हमारे पास पर्याप्त धन क्यों नहीं है?'
विक्रम ने मुस्कुराते हुए कहा, 'पुत्र, एक राजा का कर्तव्य केवल शासन करना नहीं, बल्कि अपनी सीमाओं की रक्षा करना भी है। जब हम अपने राज्य की रक्षा के लिए लड़ते हैं और शत्रुओं को पराजित करते हैं, तो उस विजय से प्राप्त होने वाली संपत्ति ही राजा की वास्तविक आय होती है।'
कुछ समय बाद, एक पड़ोसी राज्य के लालची शासक ने उनके राज्य पर हमला कर दिया। विक्रम ने बिना डरे अपनी सेना का नेतृत्व किया और वीरता से युद्ध किया। विक्रम की सूझबूझ और साहस से जीत हुई। युद्ध के बाद, पराजित शत्रु की संपत्ति और उसके क्षेत्र विक्रम के राज्य का हिस्सा बन गए।
उस धन से विक्रम ने अपने राज्य में सड़कें बनवाईं, किसानों की मदद की और प्रजा को खुशहाल बनाया। आर्यन समझ गया कि एक राजा की असली शक्ति और समृद्धि उसकी रक्षा करने की क्षमता और विजय से प्राप्त संसाधनों में निहित है।