बहुत समय पहले, विक्रम नाम का एक साहसी राजकुमार था। उसका राज्य अपने पराक्रमी योद्धाओं के लिए जाना जाता था। लेकिन जब विक्रम एक बड़ी चुनौती की तैयारी कर रहा था, तो उसके बुद्धिमान सलाहकार कवि ने एक महत्वपूर्ण बात कही: 'राजकुमार, विजय केवल शक्ति में नहीं है। आपकी जीत के लिए यह जरूरी है कि आपकी सेना की संख्या कम न हो, आपके सैनिकों के मन में आपके प्रति द्वेष न हो, और आपके खजाने में धन की कमी न हो।'
विक्रम ने इस बात को गंभीरता से लिया। सबसे पहले, उसने सैनिकों की संख्या बनाए रखने के लिए उनकी सुरक्षा और प्रशिक्षण पर ध्यान दिया। दूसरा, उसने अपने सैनिकों के साथ एक गहरा रिश्ता बनाया। वह उनके साथ बैठकर भोजन करता और उनकी समस्याओं को सुनता। इससे सैनिकों के मन में उसके प्रति नफरत के बजाय प्रेम और सम्मान पैदा हुआ।
अंत में, उसने राज्य के धन का बहुत सावधानी से प्रबंधन किया। वह जानता था कि यदि सैनिकों के पास भोजन या हथियार नहीं होंगे, तो वे युद्ध नहीं कर पाएंगे। उसने सुनिश्चित किया कि सभी संसाधन हमेशा उपलब्ध रहें। जब युद्ध का समय आया, तो विक्रम के पास न केवल एक बड़ी सेना थी, बल्कि वफादार सैनिक और पर्याप्त संसाधन भी थे। इसी कारण उसकी विजय निश्चित हुई।