एक छोटे से गाँव में आर्यन और रोहन नाम के दो पक्के दोस्त रहते थे। वे बचपन से ही साथ खेले और साथ बढ़े थे। आर्यन स्वभाव से शांत था, जबकि रोहन बहुत चंचल और शरारती था। एक दोपहर, जब वे एक पुराने पेड़ के नीचे खेल रहे थे, रोहन से गलती से आर्यन का पसंदीदा खिलौना टूट गया।
आर्यन को पहले बहुत दुख हुआ और गुस्सा भी आया। वह रोहन पर चिल्लाना चाहता था। लेकिन जब उसने रोहन की आँखों में देखा, तो उसे वहाँ केवल पछतावा और आँसू दिखाई दिए। रोहन ने धीरे से कहा, 'मुझे माफ़ कर दो आर्यन, मेरा इरादा तुम्हें दुखी करने का नहीं था।'
आर्यन ने उस टूटे हुए खिलौने को देखा और फिर अपने दोस्त को। उसे एहसास हुआ कि उनकी सालों की दोस्ती, उनके साझा किए हुए राज़ और उनका प्यार इस खिलौने से कहीं बढ़कर है। उनकी दोस्ती इतनी गहरी थी कि एक छोटी सी गलती उसे तोड़ नहीं सकती थी। आर्यन मुस्कुराया और बोला, 'कोई बात नहीं रोहन, खिलौना तो फिर आ जाएगा, पर तुम्हारी जैसी दोस्ती दोबारा नहीं मिलेगी।'