एक शांत गाँव में अर्जुन और विक्रम नाम के दो पक्के दोस्त रहते थे। एक दिन, गाँव के एक लड़के ने अर्जुन के कान में फुसफुसाते हुए कहा, 'मैंने देखा कि विक्रम ने बगीचे की बाड़ तोड़ दी है!'
यह सुनकर अर्जुन के मन में थोड़ी शंका पैदा हुई। लेकिन अर्जुन ने सोचा कि दूसरों की बातों में आकर अपने दोस्त पर शक करना ठीक नहीं है। उसने विक्रम से झगड़ा करने के बजाय सच जानने का फैसला किया। अगले दिन, अर्जुन ने विक्रम से बहुत प्यार से पूछा, 'विक्रम, मैंने कल बगीचे की बाड़ के बारे में कुछ सुना था, क्या यह सच है?'
विक्रम ने शर्मिंदगी से सिर झुका लिया और कहा, 'हाँ अर्जुन, खेलते समय मुझसे गलती से वह टूट गई। मुझे माफ कर दो।' अर्जुन ने मुस्कुराते हुए कहा, 'कोई बात नहीं दोस्त, तुमने सच बोला, यही सबसे बड़ी बात है।' क्योंकि अर्जुन ने दूसरों की बातों पर यकीन नहीं किया, इसलिए विक्रम ने अपनी गलती सुधारी और उनकी दोस्ती और भी गहरी हो गई।