एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ही दयालु और मददगार था। उसी गाँव में विक्रम नाम का एक लड़का भी रहता था। विक्रम बहुत पढ़ा-लिखा था; उसके पास दुनिया भर की किताबों का संग्रह था और उसे हर विषय का गहरा ज्ञान था।
लेकिन विक्रम के स्वभाव में अहंकार था। वह दूसरों को अपने से कमतर समझता था। एक दिन गाँव में दौड़ प्रतियोगिता हुई। अर्जुन और विक्रम दोनों ने इसमें भाग लिया। दौड़ते समय अर्जुन का पैर एक पत्थर से टकराया और उसे चोट लग गई। वह दर्द से कराहते हुए ज़मीन पर बैठ गया।
विक्रम, जो उसके पास ही दौड़ रहा था, उसने मदद करने के बजाय अर्जुन का मज़ाक उड़ाया और कहा, 'तुम बहुत कमज़ोर हो!' और वह दौड़कर जीत गया। विक्रम ने प्रतियोगिता तो जीत ली, लेकिन गाँव वालों के मन में उसके लिए सम्मान नहीं था। विक्रम ने किताबों से बहुत कुछ सीखा था, लेकिन वह यह नहीं सीख पाया कि एक अच्छा इंसान कैसे बना जाता है और दूसरों के प्रति प्रेम कैसे दिखाया जाता है।