एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन बहुत ही सीधा और सरल था, वह जल्दी ही किसी पर भी भरोसा कर लेता था। उसका एक सहपाठी था, रोहन, जो हमेशा उसके साथ रहता था। लेकिन असल में रोहन को अर्जुन की कला से जलन होती थी।
गाँव में एक बड़ी चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। अर्जुन ने एक बहुत ही सुंदर चित्र बनाया। रोहन ने अर्जुन के पास आकर बड़े प्यार से कहा, 'अर्जुन, तुम्हारा चित्र अद्भुत है! तुम ज़रूर जीतोगे। यह लो, यह खास ब्रश इस्तेमाल करो, इससे तुम्हारा काम और भी बेहतर होगा।'
अर्जुन ने खुशी-खुशी वह ब्रश ले लिया। लेकिन जैसे ही उसने चित्र बनाना शुरू किया, उस ब्रश से स्याही फैल गई और अर्जुन का सुंदर चित्र खराब हो गया। अर्जुन बहुत दुखी होकर बैठ गया। तभी उसके दादाजी वहाँ आए।
दादाजी ने प्यार से समझाया, 'बेटा अर्जुन, कभी-कभी लोग मीठी बातें इसलिए करते हैं ताकि वे तुम्हें नुकसान पहुँचा सकें। एक सच्चा दोस्त तुम्हारी जीत में मदद करता है, लेकिन एक दुश्मन तुम्हें गिराने के लिए मीठे शब्दों का सहारा लेता है।'
अर्जुन समझ गया कि रोहन की बातें तो मीठी थीं, लेकिन उसका इरादा अर्जुन को हराने का था। उसने सीखा कि शब्दों से ज्यादा इंसान के इरादों पर ध्यान देना चाहिए।