एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। वह पढ़ाई में बहुत तेज़ था और उसे ज्ञान की बातें पढ़ना बहुत पसंद था। स्कूल में वह हमेशा दूसरों को अच्छी बातें सिखाता था। वह कहता था, 'हमें हमेशा सच बोलना चाहिए' और 'हमें दूसरों की मदद करनी चाहिए।' उसकी बातें सुनकर सब उसे बहुत ज्ञानी मानते थे।
एक बार गाँव में मेला लगा था। मेले में एक खेल चल रहा था। अर्जुन बहुत बड़ा इनाम जीतना चाहता था, इसलिए उसने खेल में थोड़ी सी बेईमानी कर दी। उसके दोस्त रोहन ने यह देख लिया। रोहन ने अर्जुन से कहा, 'अर्जुन, तुम दूसरों को जो अच्छी बातें सिखाते हो, क्या तुम खुद भी उन्हें मानते हो? तुम्हारी बातों और तुम्हारे काम में बहुत अंतर है।'
अर्जुन को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसे बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई। उसे समझ आया कि केवल ज्ञान होना या दूसरों को उपदेश देना काफी नहीं है, बल्कि उस ज्ञान पर चलना सबसे ज़रूरी है। उस दिन के बाद, अर्जुन ने तय किया कि वह केवल बोलेगा नहीं, बल्कि अपने काम से भी अच्छा इंसान बनेगा।