एक सुंदर गाँव में आर्यन नाम का एक युवक रहता था। आर्यन बुद्धिमान तो था, लेकिन उसमें कुछ कमियाँ थीं। वह नई चुनौतियों से डरता था, लोगों से मिलना-जुलना पसंद नहीं करता था और उसके पास बहुत कुछ होने के बावजूद वह किसी के साथ कुछ साझा नहीं करता था। उसका मित्र विक्रम बिल्कुल इसके विपरीत था—वह साहसी था और हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहता था।
एक बार, एक यात्री गाँव में आया, जो पास के जंगल में छिपे खजाने की तलाश में था। आर्यन को जंगल में जाने से बहुत डर लग रहा था। लेकिन विक्रम ने साहस दिखाया और आगे बढ़ा। रास्ते में उन्हें एक भूखा यात्री मिला। आर्यन ने अपना भोजन देने से मना कर दिया, लेकिन विक्रम ने अपना भोजन खुशी-खुशी उसके साथ बाँट लिया।
जब वे जंगल के बीच में पहुँचे, तो एक कठिन परिस्थिति का सामना करना पड़ा। आर्यन डर के मारे काँपने लगा और विक्रम के पीछे छिप गया। विक्रम ने अपनी बुद्धिमानी और साहस से उस संकट को पार कर लिया। तब यात्री ने कहा, 'जो डरपोक है, जो अकेला रहता है और जो कंजूस है, उसे दुश्मन आसानी से हरा देते हैं। लेकिन जो साहसी और उदार है, वही वास्तव में शक्तिशाली है।' आर्यन को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने भविष्य में निडर और दयालु बनने का संकल्प लिया।