एक बहुत ही सुंदर जंगल में सोमू नाम का एक खरगोश रहता था। सोमू बहुत फुर्तीला था, लेकिन उसमें एक बुरी आदत थी—वह दूसरों का मज़ाक उड़ाता था। उस जंगल का राजा वीर नाम का एक शक्तिशाली शेर था। वीर बहुत न्यायप्रिय था, लेकिन उसके क्रोध से सब डरते थे।
एक दिन, सोमू जंगल के अन्य जानवरों का मज़ाक उड़ाने लगा। 'देखो हाथी कितनी धीरे चलता है!' और 'ये पक्षी कितना शोर मचाते हैं!' सोमू ऐसे ही बोलता रहता था। यह सुनकर राजा वीर बहुत क्रोधित हुआ। वीर ने सोमू को बुलाया और कहा, 'तुम्हारी बातों से दूसरों को दुख पहुँचता है, यह गलत है।' लेकिन सोमू ने अपनी गलती मानने के बजाय कहा, 'मैं तो बस सच बोल रहा हूँ!'
शेर के गुस्से से डरकर सोमू ने जंगल छोड़कर कहीं और जाने का फैसला किया। लेकिन वह जहाँ भी गया, वहाँ के जानवरों ने उसे पसंद नहीं किया। उसे कहीं भी नए दोस्त नहीं मिले और न ही उसे कहीं शांति मिली। अंत में सोमू को समझ आया कि एक शक्तिशाली शासक को नाराज करना कितना भारी पड़ सकता है, क्योंकि उसकी नाराजगी के बाद इंसान को कहीं भी सफलता नहीं मिलती।