बहुत समय पहले, चंद्रपुर नाम के एक समृद्ध राज्य में विक्रम नाम का एक राजा राज करता था। उसके पास अपार धन-संपत्ति और एक विशाल सेना थी। लेकिन विक्रम को अपनी शक्ति का बहुत अहंकार था।
उसी राज्य में सोमनाथ नाम के एक वृद्ध और विद्वान व्यक्ति रहते थे। वे अपनी बुद्धिमानी के लिए जाने जाते थे। एक दिन, सोमनाथ ने राज्य की सिंचाई व्यवस्था सुधारने के लिए एक बहुत अच्छा सुझाव दिया। राजा विक्रम को यह बात अच्छी नहीं लगी। उसे लगा कि यह बूढ़ा व्यक्ति उसे नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा है। गुस्से में आकर राजा ने सोमनाथ का अपमान किया और उन्हें दरबार से निकाल दिया।
कुछ ही समय बाद, राज्य में भयंकर सूखा पड़ा। फसलें बर्बाद हो गईं और प्रजा भूखी मरने लगी। राजा के पास बहुत सारा सोना और सैनिक थे, लेकिन वे सूखे को नहीं रोक सके। धीरे-धीरे राज्य की स्थिति बिगड़ने लगी। अपनी गलती का एहसास होने पर, विक्रम सोमनाथ के पास गया और उनके चरणों में गिरकर रोने लगा। उसने कहा, 'महाराज, मैंने एक ज्ञानी व्यक्ति का अपमान करके अपनी प्रजा और अपना राज्य दोनों खतरे में डाल दिए।' सोमनाथ ने उसे क्षमा कर दिया और सही मार्गदर्शन दिया। विक्रम ने फिर से एक न्यायप्रिय राजा बनकर शासन किया।