एक शांत गाँव में आर्यन नाम का एक मेहनती युवक रहता था। उसका एक दोस्त था, रोहन, जिसे शराब पीने की बुरी लत थी। जब भी रोहन शराब पीता, वह अपना होश और अपनी गरिमा खो देता था।
एक शाम, रोहन आर्यन के पास आया और गिड़गिड़ाते हुए बोला, "आर्यन, मेरे दोस्त, मुझे पीने के लिए थोड़े पैसों की ज़रूरत है। इसे पीकर मेरी सारी चिंताएँ मिट जाती हैं!" आर्यन को बुरा लगा, लेकिन रोहन के ज़ोर देने पर उसने अपनी मेहनत की कमाई से कुछ पैसे उसे दे दिए। रोहन ने उन पैसों से शराब खरीदी और पीने लगा। कुछ ही देर में रोहन लड़खड़ाने लगा और होश खो बैठा। वह अपना नाम तक नहीं पहचान पा रहा था। उसने अपने पैसे और अपनी बुद्धि, दोनों को उस नशे के लिए कुर्बान कर दिया था।
यह देखकर आर्यन बहुत दुखी हुआ। उसने महसूस किया कि पैसे देकर उसने अपने दोस्त को अज्ञानता और बेहोशी की स्थिति खरीदने में मदद की है। अगले दिन जब रोहन को होश आया, तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने समझा कि धन देकर अपनी चेतना खो देना कितनी बड़ी मूर्खता है।