बहुत समय पहले, विक्रम नाम का एक प्रतापी राजा था। वह वीर तो था, लेकिन उसे जुए का बहुत शौक था। एक दिन एक चालाक व्यापारी ने उसे लालच दिया, 'महाराज, यदि आप इस खेल में जीत गए, तो सारा संसार का धन आपका होगा।' राजा ने उसकी बातों में आकर पासे खेलना शुरू कर दिया।
शुरुआत में राजा को कुछ जीत मिली, जिससे उसका अहंकार बढ़ गया। लेकिन धीरे-धीरे वह अपना सोना, जवाहरात और राजकोष सब हारने लगा। उसके बुद्धिमान मंत्री ने कहा, 'महाराज, कृपया रुक जाइए, यह विनाश का मार्ग है।' पर राजा ने कहा, 'बस एक आखिरी बार, मैं सब कुछ वापस जीत लूँगा।' देखते ही देखते, राजा का खजाना खाली हो गया और पड़ोसी राज्यों ने उसके राज्य पर कब्जा कर लिया। जब राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ, तब तक उसके पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा था।