एक सुंदर से गाँव में करिकालन नाम का एक युवक रहता था। वह बहुत मेहनती और बुद्धिमान था। उसके पिता चाहते थे कि वह पढ़-लिखकर एक बड़ा विद्वान बने। उसकी माँ हमेशा उसका ध्यान रखती थी और उसे अच्छे कपड़े और पौष्टिक भोजन देती थी। करिकालन का भविष्य बहुत उज्ज्वल था।
लेकिन, एक दिन करिकालन जुए के जाल में फंस गया। उसने सोचा, 'बस एक बार जीत जाऊँ, तो बहुत सारा धन मिल जाएगा।' धीरे-धीरे उसने अपनी सारी जमापूंजी खो दी। फिर उसने अपनी पढ़ाई के लिए रखे पैसे और अपने माता-पिता के गहने भी जुए में लगा दिए।
जल्द ही, परिणाम बहुत बुरा हुआ। करिकालन के पास पहनने के लिए अच्छे कपड़े नहीं बचे, खाने के लिए भोजन नहीं रहा और पढ़ाई के लिए किताबें भी नहीं बचीं। समाज में उसकी प्रतिष्ठा खत्म हो गई और उसकी शिक्षा भी अधूरी रह गई। जब वह दुखी होकर बैठा था, तब उसे समझ आया कि जुआ केवल पैसा ही नहीं छीनता, बल्कि इंसान के कपड़े, धन, भोजन, सम्मान और ज्ञान—इन पांचों चीजों को नष्ट कर देता है।