एक शांत गाँव में आर्यन नाम के एक डॉक्टर रहते थे। वे अपनी समझदारी के लिए जाने जाते थे। एक तूफानी शाम, रोहन नाम का एक लड़का रोते हुए उनके पास आया, "डॉक्टर साहब, मेरे दादाजी बहुत बीमार हैं! कृपया जल्दी आकर दवा दें!"
आर्यन अपना बैग लेकर निकलने ही वाले थे कि उन्होंने रोहन से कुछ सवाल पूछे। "दादाजी की हालत कितनी गंभीर है? उन्हें बुखार है या खांसी? क्या उन्हें ठंड लग रही है या गर्मी?" रोहन ने जवाब दिया। बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी, और आर्यन जानते थे कि इस मौसम में इलाज का तरीका बदल जाता है।
जब आर्यन दादाजी के घर पहुँचे, तो उन्होंने तुरंत दवा नहीं दी। उन्होंने पहले दादाजी की नब्ज जाँची और देखा कि वे ठंड से काँप रहे हैं। उन्होंने महसूस किया कि बीमारी का कारण मौसम की नमी और ठंड है। पहले उन्होंने दादाजी को एक गर्म कंबल में लपेटा और उन्हें गरमा-गरम सूप पिलाया ताकि उनका शरीर स्थिर हो सके। उसके बाद ही उन्होंने सही दवा दी। कुछ ही दिनों में दादाजी ठीक हो गए।
रोहन ने पूछा, "डॉक्टर साहब, आपने तुरंत दवा क्यों नहीं दी?"
आर्यन मुस्कुराए और बोले, "बेटा, सही इलाज के लिए तीन चीजें जानना जरूरी है: मरीज की ताकत, बीमारी का प्रकार और मौसम का हाल। अगर हम इन्हें नजरअंदाज करेंगे, तो दवा असर नहीं करेगी।"