माधव नाम का एक ईमानदार लकड़हारा एक छोटे से गाँव में रहता था। एक दिन जंगल में लकड़ी काटते समय, उसे एक थैली मिली जो सोने के सिक्कों से भरी थी। एक पल के लिए उसके मन में लालच आया, 'अगर मैं इसे रख लूँ, तो मेरे परिवार को कभी गरीबी नहीं देखनी पड़ेगी।'
लेकिन तुरंत ही उसके भीतर की आवाज़ ने उसे रोक दिया। उसे गलत काम करने का डर था, और दूसरों के प्रति दया का भाव भी। उसे लगा कि यह धन किसी और का है और उसे वापस करना ही सही है। उसे अपनी नैतिकता और सच्चाई पर गर्व था। उसने वह थैली गाँव के मुखिया को सौंप दी। पता चला कि वह थैली एक यात्री की थी। यात्री ने माधव की ईमानदारी से खुश होकर उसे कुछ सिक्के इनाम में दिए। माधव समझ गया कि ईमानदारी से मिला सुकून, धन से कहीं बड़ा है।