एक सुंदर गाँव में रामलाल नाम का एक बहुत बड़ा व्यापारी रहता था। वह न केवल धनवान था, बल्कि बहुत दयालु भी था। गाँव के किसी भी गरीब को ज़रूरत होती, तो रामलाल सबसे पहले मदद के लिए खड़ा होता था।
लेकिन समय का चक्र घूमा और एक बड़े नुकसान के कारण रामलाल की सारी संपत्ति चली गई। वह रातों-रात बहुत गरीब हो गया। गाँव के कुछ लोग उसका मज़ाक उड़ाने लगे, "देखो, कल तक जो राजा था, आज उसके पास खाने को भी नहीं है।"
रामलाल की छोटी बेटी, मुन्नी, बहुत उदास थी। उसने रोते हुए पूछा, "पिताजी, क्या अब हम कभी खुश नहीं होंगे?"
रामलाल ने मुन्नी को खिड़की के पास ले जाकर आसमान की ओर इशारा किया। "बेटी, उन बादलों को देखो। कभी-कभी बादल बहुत घने हो जाते हैं और आसमान को ढंक लेते हैं, लेकिन वे हमेशा नहीं रहते। वे आते हैं और चले जाते हैं, और फिर से नए बादल आते हैं और बारिश लाते हैं। हमारा धन भी उन बादलों की तरह है। यह अभी चला गया है, लेकिन हमारी मेहनत और हमारे अच्छे कर्म हमें फिर से ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।"
रामलाल ने हार नहीं मानी। उसने अपनी बुद्धि और ईमानदारी से फिर से काम शुरू किया। धीरे-धीरे उसकी मेहनत रंग लाई और वह फिर से एक समृद्ध व्यक्ति बन गया। लोगों ने समझा कि उसकी गरीबी केवल बादलों की तरह एक छोटा सा दौर था।