पहाड़ों के बीच बसे एक छोटे से गाँव में कयाल नाम की एक लड़की रहती थी। उसे कढ़ाई का काम बहुत पसंद था। एक दिन, गाँव के एक अमीर व्यापारी ने उसे एक रेशमी कपड़ा सिलने के लिए दिया। काम करते समय, गलती से एक कीमती हीरे की अंगूठी उस कपड़े की तह में गिर गई। व्यापारी को इसका पता नहीं चला और वह कपड़ा ले गया।
अगले दिन, व्यापारी अपनी अंगूठी ढूंढते हुए वापस आया। कयाल को समझ आ गया कि अंगूठी उसके पास ही है। वह जानती थी कि अगर वह उस अंगूठी को रख ले, तो उसके परिवार की गरीबी दूर हो सकती है। किसी को पता भी नहीं चलेगा।
लेकिन उसका मन अशांत था। उसके पिता ने कहा, 'कयाल, धन तो फिर कमाया जा सकता है, लेकिन खोया हुआ आत्मसम्मान कभी वापस नहीं आता।' कयाल ने सोचा कि यदि वह चोरी करके अमीर बन भी गई, तो क्या वह चैन से जी पाएगी? अपनी मर्यादा खोकर जीना उसके लिए मृत्यु के समान था।
उसने तुरंत व्यापारी के पास जाकर अंगूठी लौटा दी। व्यापारी उसकी ईमानदारी देखकर बहुत खुश हुआ और उसने कयाल की पढ़ाई का खर्च उठाने का फैसला किया। कयाल के पास धन तो तुरंत नहीं आया, लेकिन उसे पूरे गाँव का सम्मान मिला।