एक सुंदर घाटी में लियो नाम का एक युवक रहता था। उसके पास एक बहुत ही उपजाऊ ज़मीन का टुकड़ा था। लेकिन लियो बहुत आलसी था। जब भी कोई उसे काम करने के लिए कहता, वह कहता, 'मैं तो गरीब हूँ, मेरी किस्मत में ही यही लिखा है।' और फिर वह सारा दिन पेड़ की छाँव में सोता रहता। उसका दोस्त सैम एक मेहनती किसान था। सैम रोज़ सुबह खेत में पसीना बहाता था।
कुछ महीनों बाद, सैम के खेत में लहलहाती फसल खड़ी थी, लेकिन लियो का खेत झाड़ियों और खरपतवार से भर गया था। लियो के घर में खाने की कमी हो गई। जब वह भूखा बैठा था, तब उसे अहसास हुआ कि उसकी गरीबी उसकी किस्मत नहीं, बल्कि उसका आलस है। उसने अपनी गलती सुधारी और मेहनत करना शुरू किया। धीरे-धीरे उसकी ज़मीन भी हरी-भरी हो गई।