एक छोटे से गाँव में कवि नाम का एक लड़का रहता था। उसका परिवार बहुत गरीब था। एक रात उसकी छोटी बहन मीरा बहुत बीमार हो गई। कवि के पास दवा खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। वह बहुत परेशान था और उसे मदद माँगने में शर्म महसूस हो रही थी।
गाँव में राघव नाम के एक बुजुर्ग रहते थे। वे बहुत धनवान थे और उनका दिल बहुत बड़ा था। वे हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते थे। कवि हिचकिचा रहा था, लेकिन अपनी बहन की हालत देखकर उसने हिम्मत जुटाई और राघव जी के घर गया। उसने बहुत ही विनम्रता से अपनी समस्या बताई।
राघव जी ने कवि को किसी भिखारी की तरह नहीं देखा, बल्कि उन्होंने इसे एक नेक काम करने के अवसर के रूप में देखा। उन्होंने तुरंत दवा के लिए पैसे दिए और डॉक्टर को भी भेजा। कवि ने सीखा कि जो लोग दान करने के लिए जाने जाते हैं, उनके सामने मदद माँगना कोई शर्म की बात नहीं है, बल्कि यह एक गरिमापूर्ण कार्य है।