एक शांत गाँव में कार्तिक और रोहन नाम के दो मित्र रहते थे। कार्तिक बहुत मेहनती था। उसने वर्षों तक पैसे बचाकर एक छोटी सी किराने की दुकान खोली थी। वहीं रोहन ऐसा व्यक्ति था जो दूसरों की तरक्की देखकर हमेशा जलता था।
समय बीतने के साथ कार्तिक का व्यापार बढ़ गया। अब वह अच्छे कपड़े पहनने लगा था और अपने परिवार के साथ अच्छा भोजन करने लगा था। यह देखकर रोहन के मन में कड़वाहट भर गई। उसने सोचा, 'कार्तिक इतनी आसानी से इतना सब कैसे पा सका? उसने ज़रूर किसी गलत तरीके से पैसा कमाया होगा।'
एक दिन रोहन ने देखा कि कार्तिक नए कपड़े पहनकर एक अच्छे भोजनालय में बैठकर भोजन कर रहा है। जलन के मारे रोहन ने गाँव वालों के बीच अफवाह फैला दी, 'कार्तिक को मत देखो, इतने अच्छे कपड़े और खाना पाने के लिए उसने ज़रूर कुछ गलत काम किया होगा। वह एक बुरा इंसान है।'
गाँव में यह बात फैल गई और कार्तिक बहुत दुखी हुआ। लेकिन गाँव वाले कार्तिक की ईमानदारी को जानते थे। जब उन्होंने देखा कि कार्तिक ने अपनी मेहनत से सब कुछ हासिल किया है, तो उन्हें समझ आ गया कि रोहन की बातें केवल उसकी ईर्ष्या का परिणाम थीं। रोहन की इस हरकत ने उसे गाँव की नज़रों में गिरा दिया और लोग उसे एक नीच स्वभाव का व्यक्ति मानने लगे।