एक छोटे से गाँव में सोमू और रवि नाम के दो दोस्त रहते थे। सोमू बहुत ही ईमानदार लड़का था, जबकि रवि हमेशा शॉर्टकट अपनाने की कोशिश करता था। एक बार गाँव में एक दौड़ प्रतियोगिता हुई, जिसका इनाम एक सोने का सिक्का था।
रवि को वह सिक्का चाहिए था, लेकिन वह मेहनत नहीं करना चाहता था। दौड़ के दौरान, जब सोमू सबसे आगे निकल रहा था, तो रवि ने जानबूझकर सोमू के पैर में एक पत्थर फंसा दिया। सोमू गिर गया और रवि जीत गया। लेकिन गाँव के मुखिया ने रवि की यह चालाकी देख ली और उसे सजा सुनाई।
सजा के डर से रवि को अपनी गलती का अहसास नहीं हुआ। इसके बजाय, उसने सोमू के पास जाकर कहा, 'सोमू, अगर तुम झूठ बोल दो कि मैंने तुम्हें नहीं गिराया, तो मैं तुम्हें इनाम का आधा हिस्सा दे दूँगा।' सोमू हैरान रह गया। रवि को अपनी गलती सुधारने में कोई दिलचस्पी नहीं थी; उसे बस उस मुसीबत से बचना था, चाहे इसके लिए उसे अपने दोस्त को ही धोखा क्यों न देना पड़े। रवि का व्यवहार यह दिखाता है कि जो लोग नीच होते हैं, वे मुसीबत आने पर अपनी ईमानदारी को भी बेच देते हैं।