पहाड़ों के बीच बसे एक छोटे से गाँव में आरव नाम का एक चित्रकार और मीरा नाम की एक लड़की रहते थे। उनके बीच एक ऐसा रिश्ता था जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल था।
जब भी वे गाँव के मेले में या फूलों के बगीचे में मिलते, आरव मीरा की आँखों में देखने की कोशिश करता। लेकिन जैसे ही आरव उसे देखता, मीरा शर्म से अपनी नज़रें झुका लेती। वह आरव से नफरत नहीं करती थी, बल्कि उसकी मौजूदगी उसे थोड़ा बेचैन कर देती थी।
एक दोपहर, आरव नदी के किनारे बैठकर चित्र बना रहा था। मीरा पास ही में फूल चुन रही थी। आरव अपनी पेंटिंग में इतना मग्न था कि मीरा को लगा कि वह उसे नहीं देख रहा है। यह सोचकर मीरा ने धीरे से अपनी नज़रें उठाईं और आरव को देखा। जैसे ही उसे लगा कि आरव उसे नहीं देख रहा, उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गई। लेकिन जैसे ही आरव ने सिर घुमाया, मीरा ने तुरंत अपनी नज़रें ज़मीन की ओर कर लीं। उस छोटी सी मुस्कान ने बिना कुछ कहे सब कुछ कह दिया था।