एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक युवक रहता था। उसे रात के समय आकाश को निहारना बहुत पसंद था। एक रात, जब पूर्णिमा का चाँद चमक रहा था, अर्जुन अपने आँगन में बैठा था। तभी उसकी छोटी बहन मीरा एक छोटा सा दीया लेकर आई। जब मीरा हँसी, तो उसके चेहरे पर एक अद्भुत चमक दिखाई दी।
अर्जुन ने चाँद को देखा और फिर मीरा को देखकर कहा, 'मीरा, चाँद बहुत सुंदर है, लेकिन तुम्हारे चेहरे की यह मुस्कान चाँद से भी ज़्यादा प्यारी और उजली है। इसमें एक अलग ही गर्माहट और प्यार है।'
मीरा ने हैरानी से पूछा, 'ऐसा क्यों भैया?' अर्जुन ने समझाया, 'चाँद तो बस रोशनी देता है, लेकिन एक स्त्री के चेहरे की वह चमक जो खुशी और प्रेम से आती है, वह दिल को छू लेती है। वही असली सुंदरता है।'
उस रात अर्जुन ने सीखा कि असली चमक केवल रोशनी में नहीं, बल्कि प्रेम और प्रसन्नता से भरे चेहरे की मुस्कान में होती है।