एक शांत गाँव में कविन और मीरा नाम के दो दोस्त रहते थे। वे दोनों बहुत ही संस्कारी और अनुशासित थे। वे हमेशा अपने बड़ों के बताए रास्तों पर चलते थे।
जैसे-जैसे वे बड़े हुए, मीरा के मन में कविन के प्रति एक नया और गहरा आकर्षण पैदा होने लगा। यह भावना इतनी तीव्र थी कि मीरा को लगने लगा कि वह अपनी मर्यादा और अपने संस्कारों को भूलती जा रही है। उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे उसके चरित्र की नाव, वासना की तेज़ लहरों में बह रही हो।
कविन ने उसकी बेचैनी को समझा और बहुत प्यार से कहा, 'मीरा, ये भावनाएं एक तेज़ नदी की तरह हैं। अगर हमारे पास मर्यादा और आत्म-नियंत्रण की नाव नहीं होगी, तो ये लहरें हमें बहा ले जाएंगी और हम अपना सब कुछ खो देंगे।'
मीरा को कविन की बात समझ आ गई। उसने महसूस किया कि भावनाओं का होना गलत नहीं है, लेकिन उनके वश में होकर अपने मूल्यों को छोड़ देना गलत है। उसने अपने मन पर नियंत्रण रखना सीखा और अपने चरित्र की गरिमा को बनाए रखा।