एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक युवक रहता था। वह एक लड़की को पसंद करता था, लेकिन उसने कभी किसी को बताया नहीं। पर गाँव की महिलाओं के बीच उसकी बातों की चर्चा होने लगी। 'क्या तुमने देखा, अर्जुन उसे देखता रहता है?' ये अफवाहें अर्जुन के मन में उस भावना को और गहरा कर रही थीं, जैसे खाद मिट्टी को उपजाऊ बनाती है।
जब उसकी माँ मीरा को यह पता चला, तो उन्होंने उसे समझाने के बजाय बहुत डाँटा। 'तुम हमारे परिवार का नाम खराब कर रहे हो!' उन्होंने गुस्से में कहा। माँ के वे कड़वे शब्द उस भावना के लिए पानी की तरह थे, जिसने उस आग को बुझाने के बजाय और भड़का दिया। अफवाहों ने उसके मन में विचारों को जन्म दिया और माँ की कड़वाहट ने उन विचारों को और भी गहरा कर दिया। अर्जुन अपने ही मन के द्वंद्व में फंस गया था।