एक शांत घाटी में ईशान नाम का एक मूर्तिकार और उसकी पत्नी मीरा रहते थे। एक बार ईशान को दूर देश के एक मंदिर में मूर्तियाँ बनाने के लिए बुलाया गया। जाने से पहले मीरा ने ईशान का हाथ थामकर भावुक होकर कहा, 'ईशान, अगर आप हमेशा के लिए जा रहे हैं, तो मुझे बता दें ताकि मैं अपने मन को संभाल सकूँ। लेकिन अगर आप जल्द ही वापस आएंगे, तो बस मुझे यह खबर दे दीजिएगा। आपके लौटने की खबर ही मुझे इस अकेलेपन में जीवित रखेगी।'
महीने बीत गए। मीरा हर दिन खिड़की के पास बैठकर रास्ते को निहारती रहती। गाँव में आने वाले हर मुसाफिर से वह पूछती, 'क्या आपने मेरे ईशान को देखा है? क्या वह वापस आएंगे?' एक दिन एक यात्री ने बताया, 'मैंने सुना है कि मूर्तिकार बहुत जल्द अपने घर लौट रहे हैं।' उस एक वाक्य ने मीरा के जीवन में रोशनी भर दी। उन्हें पता नहीं था कि वे कब आएंगे, लेकिन उन्हें यह पता था कि वे ज़रूर आएंगे। इसी उम्मीद ने उन्हें हर दिन मुस्कुराते हुए जीने की शक्ति दी। अंततः जब ईशान वापस आया, तो मीरा की प्रतीक्षा एक सुंदर मिलन में बदल गई।