एक शांत गाँव में इलंगो नाम का एक मूर्तिकार और उसकी पत्नी नीला रहते थे। एक बार इलंगो को एक राजमहल के बगीचे में काम करने का अवसर मिला। वहाँ उसने एक चमकता हुआ कीमती हीरा देखा। उस हीरे को पाने की तीव्र इच्छा उसके मन में जाग उठी। उसे लगा कि इस इच्छा का सुख समुद्र की तरह विशाल और अनंत होगा।
लेकिन धीरे-धीरे उस इच्छा ने उसकी शांति छीन ली। वह अपने काम पर ध्यान नहीं दे पा रहा था और नीला के साथ बिताए जाने वाले सुखद पलों को भी भूल गया। हीरा चोरी करने के डर ने उसे रात भर जगाए रखा। उसे महसूस हुआ कि उस हीरे से मिलने वाली कल्पना मात्र खुशी की तुलना में, उस लालच से होने वाला मानसिक तनाव और डर कहीं अधिक बड़ा और गहरा है। उसने सीखा कि क्षणिक इच्छाएँ केवल दुख ही लाती हैं।