अर्जुन और मीरा एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। एक बार अर्जुन को काम के सिलसिले में शहर से बाहर जाना पड़ा। जाने से पहले मीरा ने कहा, 'आप जब चाहें मुझे याद कर सकते हैं, मैं आपका इंतज़ार करूँगी।'
कुछ दिनों बाद, अर्जुन अपने काम में बहुत व्यस्त था। अचानक उसके मन में मीरा का ख्याल आया। वह ख्याल बिल्कुल वैसा ही था जैसे छींक आने वाली हो पर आए नहीं। उस पल उसे मीरा को फोन करने की इच्छा हुई, लेकिन वह विचार अधूरा रह गया। जैसे छींक न आने पर बेचैनी होती है, वैसे ही उस अधूरे विचार ने अर्जुन के मन में एक अजीब सी हलचल पैदा कर दी।
दूसरी ओर, मीरा भी अर्जुन को याद कर रही थी। उसे महसूस हो रहा था कि अर्जुन उसे याद कर रहा होगा। वह एक संदेश या कॉल का इंतज़ार कर रही थी। लेकिन जब वह पल बीत गया, तो उसे एक खालीपन महसूस हुआ। जब अर्जुन वापस आया, तो उन्हें समझ आया कि प्यार और यादों को साझा करने में देरी नहीं करनी चाहिए। सही समय पर व्यक्त न की गई भावना मन में एक टीस की तरह रह जाती है।