एक शांत गाँव में माया नाम की एक महिला रहती थी। उसका अपने पति अर्जुन के साथ बहुत गहरा प्रेम था। लेकिन एक दिन बहस के दौरान, गुस्से में आकर अर्जुन ने कह दिया, 'तुम और मैं बिल्कुल अलग हैं, हमारा आपस में कोई संबंध नहीं है।'
उन शब्दों ने माया के हृदय को छलनी कर दिया। वह जो खुद को अर्जुन का आधा हिस्सा मानती थी, उसे इन शब्दों ने एक अजनबी बना दिया। वह दिन-रात बस यही सोचती रहती कि कैसे अर्जुन ने उन्हें अलग कर दिया। उस क्रूरता के बारे में सोचते-सोचते उसकी जीने की इच्छा ही खत्म होने लगी। उसे महसूस हुआ जैसे उसकी आत्मा धीरे-धीरे दम तोड़ रही है।
कुछ दिनों बाद अर्जुन को अपनी गलती का अहसास हुआ। माया की हालत देखकर उसका हृदय ग्लानि से भर गया। उसने महसूस किया कि प्रेम में 'हम अलग हैं' कहना कितना घातक हो सकता है। उसने माया से क्षमा मांगी और अपनी भूल सुधारी।