एक शांत गाँव में माधवी और अर्जुन नाम के पति-पत्नी रहते थे। अर्जुन एक व्यापारी था और काम के सिलसिले में अक्सर दूर यात्राओं पर जाता था। माधवी को अर्जुन के साथ बिताया गया हर पल बहुत प्रिय था। एक सुबह, जब अर्जुन अपनी लंबी यात्रा पर निकलने वाला था, माधवी ने हँसते हुए कहा, 'जब आप चले जाएंगे, तो मुझे बहुत दुख होगा!' अर्जुन मुस्कुराया और चला गया।
कुछ दिन बीत गए। सूरज ढलने लगा और शाम होने लगी। जैसे ही आसमान का रंग बदलने लगा, माधवी के दिल में एक अजीब सी उदासी छा गई। घर का हर कोना अर्जुन की कमी महसूस करा रहा था। जब अर्जुन उसके पास था, तब उसे कभी अहसास नहीं हुआ कि शाम का यह समय इतना भारी और अकेला हो सकता है। उसने महसूस किया कि अपनों की मौजूदगी में ही असली खुशी होती है, और उनके जाने के बाद शाम की सुंदरता भी दर्द बन जाती है।