एक शांत गाँव में अर्जुन और मीरा नाम का एक जोड़ा रहता था। अर्जुन एक मूर्तिकार था और मीरा एक चित्रकार। एक बार अर्जुन को काम के सिलसिले में दूर शहर जाना पड़ा। जब वह जाने लगा, तो मीरा का मन थोड़ा उदास हो गया।
सुबह जब अर्जुन निकला, तो मीरा के मन में वह उदासी एक छोटे से बीज की तरह पैदा हुई। उसने दिन भर अपने काम में मन लगाने की कोशिश की, लेकिन अर्जुन की यादें उसे बार-बार सताती रहीं। जैसे-जैसे दिन बीतता गया, वह उदासी उसके मन में बढ़ती गई।
शाम होते-होते, वह उदासी एक खिलते हुए फूल की तरह उसके पूरे मन पर छा गई। शाम की शांति उसे बहुत भारी लगने लगी। वह खिड़की के पास बैठकर बस उसका इंतज़ार करती रही। विरह का वह दर्द शाम के समय अपने चरम पर था। अंत में, जब अर्जुन वापस आया, तब जाकर वह सारा दर्द मिटा और खुशियाँ वापस आईं।